पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरी गाज
देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंककला में घटित हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद अब शासन और प्रशासन स्तर पर कड़े कानूनी व दंडात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए गए हैं। दिल दहला देने वाले इस हादसे के ठीक तीन दिन बाद उज्जैन संभाग के कमिश्नर (संभागायुक्त) आशीष सिंह ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए टोंकखुर्द के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) संजीव सक्सेना और टप्पा चिड़ावद के नायब तहसीलदार रवि शर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।
विदित हो कि 14 मई को एबी रोड पर स्थित एक अवैध व असुरक्षित पटाखा निर्माण इकाई में हुए अत्यंत शक्तिशाली विस्फोट में 5 निर्दोष मजदूरों की असमय मौत हो गई थी, जबकि लगभग 21 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। इस भयावह त्रासद घटना के बाद से ही स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली, अनदेखी और कथित मिलीभगत को लेकर चौतरफा तीखे सवाल खड़े किए जा रहे थे।
जांच रिपोर्ट में फूटा लापरवाही का घड़ा, नियमों को ताक पर रखा
घटना की उच्च स्तरीय प्रारंभिक जांच में यह बात प्रमाणित हुई है कि संबंधित फैक्ट्री में बारूद और अन्य ज्वलनशील विस्फोटक सामग्रियों के भंडारण, सुरक्षा मानकों और तय नियमों की मॉनिटरिंग को लेकर स्थानीय राजस्व अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती थी। मध्य प्रदेश शासन की स्पष्ट गाइडलाइन के मुताबिक, ऐसी संवेदनशील फैक्ट्रियों का समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाना अनिवार्य था, लेकिन जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने दायित्वों के प्रति घोर उदासीनता दिखाई।
सिविल सेवा नियमों के तहत सस्पेंशन का हंटर चला
उज्जैन संभाग आयुक्त कार्यालय से जारी कड़े आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दोनों ही अधिकारियों को 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1966' के सुसंगत प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी पाते हुए सस्पेंड किया गया है। निलंबन पत्र के अनुसार, एसडीएम संजीव सक्सेना और नायब तहसीलदार रवि शर्मा अपने अधिकार क्षेत्र में बारूद के अवैध संग्रहण और नियमों के उल्लंघन को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे, जिसके चलते यह भयावह कांड हुआ।
मासूमों की मौत से लोगों में भारी आक्रोश, अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे घायल
इस दर्दनाक हादसे के बाद से ही देवास अंचल के नागरिकों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का साफ तौर पर कहना है कि यदि इन जिम्मेदार अफसरों ने दफ्तरों से बाहर निकलकर समय रहते इस मौत की फैक्ट्री की सही ढंग से जांच की होती, तो आज कई हंसते-खेलते परिवार तबाह होने से बच जाते। इस धमाके ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं, वहीं कई गंभीर रूप से घायल लोग अब भी विभिन्न अस्पतालों के आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
कलेक्टर दफ्तर अटैच रहेगा मुख्यालय, विस्तृत जांच शुरू
सस्पेंशन की इस अवधि के दौरान दोनों ही अधिकारियों का विभागीय मुख्यालय जिला कलेक्टर कार्यालय नियत किया गया है। संभागायुक्त ने इस मामले की एक विस्तृत और बिंदुवार मजिस्ट्रियल जांच के भी आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही, बारूद का लाइसेंस देने, फैक्ट्री संचालन की अनुमति देने और सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी करने वाले अन्य संबंधित तकनीकी विभागों की संदिग्ध भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
