चंडीगढ़। पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ सख्त संशोधन विधेयक लाकर आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने पंथक एजेंडे को सियासी मजबूती दी है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है जिससे आप ने पंथक राजनीति में बढ़त हासिल करने की कोशिश की है।

कांग्रेस का बिल राष्ट्रपति के पास लंबित

2018 में कांग्रेस सरकार का बिल अब भी राष्ट्रपति के पास लंबित है जबकि जुलाई 2025 में आप सरकार का पवित्र धर्मग्रंथों के विरुद्ध अपराध निवारण अधिनियम-2025 सिलेक्ट कमेटी में अटका हुआ है। इस नए बिल में सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों, प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियों और महानुभावों की प्रतिमाओं को शामिल करने का प्रस्ताव था लेकिन इसमें कई कानूनी पेचिदगियां सामने आईं। ऐसे में आप सरकार ने रणनीति बदलते हुए 18 साल पुराने कानून में संशोधन कर केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब पर केंद्रित सख्त प्रावधानों वाला विधेयक सदन में पारित करा लिया। इसे खालसा पंथ के सृजन दिवस 13 अप्रैल को पेश किया गया जो राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि इस संशोधित स्टेट एक्ट को दोबारा सदन में लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसे राज्यपाल की मंजूरी मिल जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम सिख मतदाताओं को साधने की बड़ी कवायद और आप सरकार का मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है।

सभी धर्मों के ग्रंथों की बेअदबी पर भी सख्त कानून जरूरी

पूर्व हेड ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग लंबे समय से थी और सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं इसलिए कड़ा कानून जरूरी है। साथ ही उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों और प्रतीकों की बेअदबी को भी असहनीय बताते हुए इस पर समान रूप से सख्त कानून बनाने की जरूरत पर जोर दिया।