सुपर-स्पेशियलिटी सीटों में इजाफा, स्वास्थ्य सेवाएं होंगी बेहतर
चंडीगढ़। पीजीआई में सुपर-स्पेशियलिटी कोर्सेज की सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के तहत कुल 68 सीटों में इजाफा किया जाएगा जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा। आजकल हृदय, मस्तिष्क, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इन जटिल बीमारियों के इलाज के लिए उच्च प्रशिक्षित सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी जरूरत है।
पीजीआई प्रशासन के अनुसार स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी से स्वीकृति मिलने के बाद अब आगे की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सीटें बढ़ने से न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी बल्कि ओपीडी, जांच और सर्जरी के लिए लंबा इंतजार भी कम होगा। प्रस्ताव के तहत न्यूरोसर्जरी में 6, कार्डियोलॉजी में 12, न्यूरोलॉजी में 14, हेपेटोलॉजी में 7 और क्लिनिकल हेमेटोलॉजी में 6 सीटें बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर में 9, प्लास्टिक सर्जरी में 4 और कार्डियक एनेस्थीसिया व इंटेंसिव केयर में 10 सीटों का इजाफा किया जाएगा। पीजीआई में रोजाना 10 से 12 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण लंबी कतारें और सर्जरी के लिए महीनों की वेटिंग आम है। ऐसे में सीटों में यह बढ़ोतरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सुपर-स्पेशलिस्ट की बढ़ती जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार हृदय, मस्तिष्क, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन बीमारियों के इलाज के लिए उच्च प्रशिक्षित सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। सीटें बढ़ने से आने वाले वर्षों में अधिक विशेषज्ञ तैयार होंगे जिससे इलाज की गुणवत्ता और पहुंच दोनों बेहतर होंगी।
मरीजों को होगा सीधा फायदा
इस फैसले से ओपीडी में भीड़ कम होगी और मरीजों को जांच व सर्जरी की तारीख जल्दी मिल सकेगी। गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध होगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। पीजीआई का यह कदम ट्राइसिटी ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों के लिए राहत भरा साबित होगा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगा।
