सीमा पार से जासूसी का जाल, कैमरे लगाकर सेना पर रखी जा रही थी नजर
ISI की 'डिजिटल जासूसी' का भंडाफोड़: सैन्य ठिकानों पर चीन निर्मित कैमरों से निगरानी की साजिश नाकाम
नई दिल्ली/जालंधर: 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बौखलाई पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और वहां की सेना ने भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक खतरनाक जाल बिछाया था। इस नापाक साजिश के तहत दिल्ली से लेकर कश्मीर तक संवेदनशील सैन्य इलाकों, मुख्य राजमार्गों और रेलवे स्टेशनों के पास चीन निर्मित हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान पहुंच रही थी।
कैसे काम कर रहा था यह नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान में बैठा 'फौजी' नाम का एक हैंडलर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वह स्थानीय गुर्गों को चंद हजार रुपयों का लालच देकर इन रणनीतिक स्थानों पर सिम कार्ड और वाई-फाई से लैस कैमरे इंस्टॉल करवाता था। इन कैमरों का उद्देश्य भारतीय सेना की 'वेस्टर्न' और 'नार्दर्न' कमांड की मूवमेंट, विशेषकर सड़क और रेल मार्ग से होने वाले सैन्य विस्थापन की सटीक जानकारी जुटाना था।
इन इलाकों में पकड़े गए जासूसी कैमरे:
सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने मिलकर इस नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है:
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पंजाब: जालंधर और कपूरथला से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 4G कनेक्टिविटी वाले चीनी कैमरे, सोलर प्लेट और विदेशी हैंडलरों से जुड़े मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।
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अंबाला: नेशनल हाईवे 152 के ओवरब्रिज पर दो जासूसी कैमरे मिले थे, जिनमें सिम कार्ड लगे हुए थे। इनका एक्सेस सीधे पाकिस्तान में था।
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दिल्ली व गाजियाबाद: दिल्ली रेलवे स्टेशन और गाजियाबाद में जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 11 आरोपियों को दबोचा गया।
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राजस्थान: अलवर और बीकानेर छावनी क्षेत्र में भी सोलर कैमरों के जरिए जासूसी करने वाले मॉड्यूल को ध्वस्त किया गया।
सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी
पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियां और राज्य पुलिस मिलकर इस साजिश की गहराई से जांच कर रही हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मिली करारी हार के बाद पाकिस्तान अब इस 'डिजिटल जासूसी' के जरिए भारतीय सेना को नुकसान पहुंचाने की फिराक में है, लेकिन सतर्क सुरक्षा बल लगातार इस मॉड्यूल को तबाह कर रहे हैं।
