चंडीगढ़। भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे पंजाब को मानसून ने बड़ी राहत दी है। बुधवार देर रात राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश हुई, जिसने पूरे प्रदेश को सराबोर कर दिया। इस मानसूनी बारिश के चलते पंजाब के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, राज्य का अधिकतम तापमान सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रोपड़ में 35.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

अगले 6 दिनों तक आंधी-बारिश का दौर, 5 जुलाई से भारी बरसात की चेतावनी

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, मानसून अब पंजाब के लगभग सभी इलाकों में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। मौसम वैज्ञानिकों ने अनुमान जताया है कि अगले छह दिनों तक राज्य में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होगी और इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। इसके साथ ही विभाग ने 5 जुलाई से अगले चार दिनों के लिए भारी बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया है, जिससे आने वाले दिनों में तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट देखने को मिल सकती है।

कहां कितनी हुई बरसात और कैसा रहा शहरों का मिजाज?

पंजाब के अलग-अलग जिलों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है, जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • बारिश के प्रमुख आंकड़े: फरीदकोट में सबसे ज्यादा 89.0 मिमी बारिश हुई। इसके बाद लुधियाना में 82.5 मिमी, फिरोजपुर में 68.0 मिमी, मोगा में 57.5 मिमी और बठिंडा में 56.0 मिमी पानी बरसा।

  • प्रमुख शहरों का तापमान: वीरवार को अमृतसर में पारा 33.1 डिग्री, लुधियाना में 33.2 डिग्री, पटियाला में 32.4 डिग्री और बठिंडा में 34.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, राज्य में सबसे कम न्यूनतम तापमान बठिंडा में 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

गर्मी घटते ही सुधरे हालात: बिजली की मांग में आई बंपर कमी

इस मानसूनी बारिश ने पंजाब सरकार और बिजली विभाग (पावरकॉम) को बहुत बड़ी संजीवनी दी है। तपती गर्मी और धान की बुआई का सीजन होने के कारण पिछले कई दिनों से प्रदेश में बिजली की मांग लगातार 17,000 मेगावाट के पार चल रही थी। लेकिन बारिश होते ही महज 24 घंटे के भीतर बिजली की अधिकतम मांग 17,112 मेगावाट से घटकर 15,682 मेगावाट पर आ गई। यानी सीधे तौर पर 1430 मेगावाट की कमी दर्ज की गई है।

एसी बंद और ट्यूबवेल थमे, अघोषित कटों से मिलेगी मुक्ति

मौसम सुहाना होने के कारण घरों में एसी का इस्तेमाल कम हो गया है और खेतों में पर्याप्त पानी मिलने से किसानों के ट्यूबवेल भी शांत हैं। इससे पहले पावरकॉम पर निर्बाध बिजली सप्लाई का भारी दबाव था, जिसके चलते शहरों और उद्योगों में अघोषित बिजली कटौती हो रही थी और किसानों को भी दिन में महज 4 घंटे ही बिजली मिल पा रही थी। अब इस मांग में आई कमी से उपभोक्ताओं को कटों से राहत मिलेगी।

पावर ग्रिड का गणित: उत्पादन ठप होने के बावजूद स्थिति नियंत्रण में

वीरवार को बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने अपने आंतरिक स्रोतों से कुल 5,222 मेगावाट बिजली जुटाई। इसमें सरकारी थर्मल प्लांटों से 1695 मेगावाट, हाइड्रो (जल) परियोजनाओं से 810 मेगावाट और प्राइवेट थर्मल प्लांटों से 2682 मेगावाट बिजली मिली। बची हुई 10,648 मेगावाट बिजली की आपूर्ति नॉर्दर्न ग्रिड (उत्तरी ग्रिड) से की गई।