चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर खोलने की तैयारी शुरू हो गई है।

यहाँ इस खबर का परिवर्तित और व्यवस्थित रूप दिया गया है:

  • हरियाणा: मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे हाई-टेक ट्रॉमा सेंटर, सड़क हादसों में जान बचाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला
  • चंडीगढ़: सड़क दुर्घटनाओं के दौरान 'गोल्डन ऑवर' (हादसे के बाद का पहला घंटा) में घायलों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
  • विशेषज्ञ कमेटी करेगी आकलन

इस पूरी परियोजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए रोहतक पीजीआई (PGIMS) के निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है।

  • सदस्य: इस समिति में करनाल, सोनीपत (खानपुर कलां) और नूंह के मेडिकल कॉलेजों के निदेशक भी शामिल हैं।
  • समय सीमा: कमेटी को अगले 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं और चरणों का विवरण होगा।

लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर में क्या होगा खास?

इन सेंटरों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को भागना न पड़े। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएँ होंगी:

  • 24/7 इमरजेंसी: चौबीसों घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की ऑन-कॉल उपलब्धता।
  • अत्याधुनिक लैब: हड्डी रोग उपचार, आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे और आधुनिक प्रयोगशालाएँ।
  • रेफरल सिस्टम: अत्यंत गंभीर स्थिति में मरीज को उच्च स्तरीय केंद्रों (लेवल-1 या 2) में भेजने की त्वरित व्यवस्था।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत? (भयावह आंकड़े)

हरियाणा में सड़क हादसों के आंकड़े डराने वाले हैं, जो इस फैसले की अनिवार्यता को दर्शाते हैं:
मृत्यु दर: साल 2014 से अब तक प्रदेश में 57,901 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
हादसे: बीते 11 वर्षों में लगभग 1.15 लाख दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं।
सबसे प्रभावित जिले: गुरुग्राम, सोनीपत, करनाल, पानीपत और झज्जर में दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या सर्वाधिक रही है।