लापरवाही के आरोप में बड़ा कदम, मुंबई पुलिस ने कॉन्स्टेबल को किया बर्खास्त
मुंबई: एनसीपी (NCP) के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की सनसनीखेज हत्या के मामले में मुंबई पुलिस ने एक बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया है। विभाग ने सुरक्षा में तैनात रहे बॉडीगार्ड कॉन्स्टेबल श्याम सोनावणे को कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में आधिकारिक तौर पर सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस दिन की निष्क्रियता के आधार पर की गई है जब हमलावरों ने बांद्रा में सिद्दीकी पर जानलेवा हमला किया था।
सुरक्षा घेरे में चूक और बर्खास्तगी की वजह
12 अक्टूबर 2024 की शाम जब तीन हमलावरों ने बाबा सिद्दीकी को निशाना बनाया, तब कॉन्स्टेबल श्याम सोनावणे उनकी सुरक्षा टीम का हिस्सा थे। जांच में पाया गया कि गोलीबारी के दौरान सोनावणे ने कोई ठोस जवाबी प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, बचाव में उन्होंने तर्क दिया था कि पटाखों के शोर के कारण वे स्थिति को तुरंत भांप नहीं पाए, लेकिन विभागीय जांच में उन्हें लापरवाही का दोषी पाया गया। सितंबर 2025 में कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद, अब 2 मई को उन्हें बर्खास्तगी का पत्र सौंप दिया गया है।
मामले में अब तक 27 गिरफ्तारियां और चार्जशीट
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच कर रही मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने अब तक 27 आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया है। इनमें हरियाणा के गुरमेल बलजीत सिंह और उत्तर प्रदेश के धर्मराज कश्यप जैसे कथित शूटर भी शामिल हैं। पुलिस ने हत्या की साजिश रचने, रेकी करने और फंडिंग मुहैया कराने वाले पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। दिसंबर 2025 में इस मामले में 200 पन्नों की एक पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
बिश्नोई गैंग से संबंध और 'डब्बा कॉलिंग' का खुलासा
क्राइम ब्रांच की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में करीब 30 गवाहों के बयानों के आधार पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी अमोल गायकवाड़, फरार मास्टरमाइंड शुभम लोणकर के सीधे संपर्क में था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी पुलिस की पकड़ से बचने के लिए 'डब्बा कॉलिंग' और 'सिग्नल' जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का उपयोग कर रहे थे। चार्जशीट में बिश्नोई गैंग के साथ आरोपियों के सीधे संबंधों का भी दावा किया गया है।
राजधानी की राजनीति में सुरक्षा पर फिर उठी बहस
पूर्व मंत्री की उनके बेटे ज़ीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर हुई इस हत्या ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पुलिस विभाग द्वारा अपने ही कर्मचारी की बर्खास्तगी यह संकेत देती है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस अन्य फरार आरोपियों और इस बड़ी साजिश के मुख्य सूत्रधारों की तलाश में जुटी है।
