गया। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के न्यू एरिया पिपरपांती मोहल्ले में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब ड्रग विभाग और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने कांग्रेस के पूर्व सांसद दिवंगत रंजीत सिंह के मकान पर औचक छापेमारी की, जहां से भारी मात्रा में संदिग्ध नकली और प्रतिबंधित नशीली दवाएं बरामद की गई हैं। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

उसी परिसर में चलता है सरकारी दफ्तर, गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, जिस मकान में यह अवैध धंधा चल रहा था, उसी परिसर में किराए पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग का सरकारी कार्यालय भी संचालित होता है। ड्रग विभाग को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि इस रिहायशी इलाके से बड़े पैमाने पर नशीली और अवैध दवाओं का काला कारोबार चलाया जा रहा है। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सहायक औषधि नियंत्रक विजय कुमार के नेतृत्व में ड्रग विभाग और पुलिस बल ने संयुक्त रणनीति बनाकर इस ठिकाने पर धावा बोला।

भारी पुलिस बल की मुस्तैदी के बीच छानबीन, सहायक औषधि नियंत्रक ने की पुष्टि

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिहाज से पूरे पिपरपांती मोहल्ले में भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। अचानक हुई इस छापेमारी से दवा माफियाओं में खलबली मच गई। मामले की पुष्टि करते हुए सहायक औषधि नियंत्रक विजय कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह गुप्त सूचना के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छापेमारी के दौरान मौके से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली दवाइयां जब्त की गई हैं।

दवाओं की गिनती पूरी होने के बाद होगा आधिकारिक खुलासा

सघन तलाशी के दौरान दवाओं के कई बड़े कार्टन हाथ लगे हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस और विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बरामद की गई संदिग्ध दवाओं की कुल खेप और उनकी कीमतों का सटीक आकलन पूरी छानबीन के बाद ही किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि जब्ती की सूची (सीजर लिस्ट) तैयार होने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मामले का विस्तृत और आधिकारिक खुलासा मीडिया के सामने किया जाएगा।

जानिए कौन थे रंजीत सिंह

जिस मकान में यह छापेमारी हुई है, वह झारखंड के चतरा लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे पूर्व सांसद रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह का है। पूर्व सांसद रंजीत सिंह का कुछ साल पहले निधन हो चुका है, जिसके बाद उनके इस परिसर के अलग-अलग हिस्सों को किराए पर दिया गया था। फिलहाल पुलिस इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस अवैध दवा नेटवर्क के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।