30वां या सातवां अपराध: बिहार पुलिस का क्रूर लेकिन तुरंत सजा का तरीका
पटना। बिहार में कानून-व्यवस्था की सूरत अब पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। पिछले कुछ समय से राज्य में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का कड़ा और आक्रामक रुख देखने को मिल रहा है। राजनीतिक गलियारों में भले ही यह चर्चा थी कि उत्तर प्रदेश का 'योगी मॉडल' बिहार में लागू नहीं होगा, लेकिन गृह विभाग की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में स्थितियां बदल चुकी हैं। पूर्व की सरकारों में जहाँ अपराधियों के 'हाफ एनकाउंटर' की खबरें आती थीं, वहीं अब पुलिस सीधे 'ऑन-स्पॉट' जवाब दे रही है। पिछले साल नवंबर से लेकर अब तक छह खूंखार अपराधी पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं, जबकि 23 अपराधियों को पुलिस ने पैर में गोली मारकर घुटनों पर ला दिया है।
इस सख्त कार्रवाई पर विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि राज्य में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और एनडीए सरकार जाति देखकर 'फर्जी और सिलेक्टिव एनकाउंटर' कर रही है। इन आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती। सरकार पूरी तरह निष्पक्ष होकर समाज में अशांति फैलाने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपना रही है।
आइए जानते हैं मुठभेड़ में ढेर हुए उन 6 खूंखार अपराधियों का पूरा काला चिट्ठा:
1. बेगूसराय में ₹50 हजार का इनामी नक्सली दयानंद मालाकार ढेर
31 दिसंबर 2025 को बेगूसराय के तेघड़ा इलाके में एसटीएफ और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इसमें 50 हजार का इनामी नक्सली दयानंद मालाकार उर्फ छोटू मारा गया। सादी वर्दी में पहुंची पुलिस टीम पर सरसों के खेत में घात लगाए नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में दयानंद मारा गया। उस पर माकपा नेता दिनेश सिंह के घर को डायनामाइट से उड़ाने और माकपा नेता रामपुकार चौरसिया की हत्या समेत बेगूसराय, खगड़िया और मुजफ्फरपुर में 16 गंभीर मामले दर्ज थे।
2. वैशाली में ₹2 लाख का इनामी सोना लुटेरा 'प्रिंस' मारा गया
6 फरवरी 2026 को वैशाली में एसटीएफ और पुलिस ने साझा ऑपरेशन चलाकर कुख्यात सोना लुटेरा प्रिंस उर्फ अभिजीत उर्फ चश्मा को मार गिराया। सुबोध सिंह गैंग का यह शार्प शूटर बिहार समेत 7 राज्यों में वांछित था। उस पर 300 किलो से अधिक सोना लूटने, डकैती और रंगदारी के 30 से अधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 2018 में हाजीपुर कोर्ट परिसर में हवलदार राम एकबाल रविदास की हत्या कर वह फरार हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उस पर दो लाख का इनाम रखा था।
3. मोतिहारी में जवान को शहीद करने वाले कुंदन और प्रियांशु का अंत
17 मार्च 2026 को पूर्वी चंपारण के चकिया इलाके में एसटीएफ और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे ढेर हो गए। हालांकि, इस बहादुरी के ऑपरेशन में एसटीएफ जवान श्रीराम कुमार यादव भी शहीद हो गए। आरोपी कुंदन ठाकुर ने पुलिस अधिकारियों को जान से मारने की धमकी दी थी और घेराबंदी के दौरान पुलिस पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं।
4. भागलपुर में अधिकारियों के हत्यारे रामधनी यादव को लगी 5 गोलियां
29 अप्रैल 2026 को भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और सभापति की दिनदहाड़े हत्या करने वाले मुख्य आरोपी रामधनी यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। हथियार बरामदगी के दौरान उसके गुर्गों ने पुलिस पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में रामधनी को 5 गोलियां लगीं। रामधनी का अपराध इतिहास साल 1982 से था। उसने साल 2000 में एक व्यापारी की हत्या कर थाने में सरेंडर कर पुलिस को भी चौंका दिया था।
5. सीवान में भाजपा नेता के भांजे की हत्या का आरोपी सोनू यादव ढेर
3 मई 2026 को सीवान में पुलिस मुठभेड़ के दौरान सोनू यादव मारा गया। सोनू ने 29 अप्रैल को भाजपा नेता मनोज कुमार सिंह के भांजे हर्ष सिंह और उनके बहनोई पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं, जिसमें हर्ष की मौत हो गई थी। बाइक से भागने की फिराक में लगे सोनू को जब पुलिस ने लकड़ी और गौसीहाता के बीच घेरा, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में सोनू के सीने में गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया।
