प्रियंका गांधी की जेठानी के फार्म पर कब्जे का मामला, हाई कोर्ट ने अधिकारियों को बुलाया
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) ने ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा स्थित पिपलिया मोड़ पर स्थित 'कुलसुम खान फार्म' पर भू-माफियाओं द्वारा किए गए कथित अवैध व जबरन कब्जे के खिलाफ दायर एक अत्यंत संवेदनशील याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में दखल देते हुए पीड़ित महिलाओं, असहाय बच्चों और फार्म में मौजूद बेजुबान पशुओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने शासकीय तंत्र की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।
एसडीएम और कोतवाली प्रभारी को सोमवार को कोर्ट में सशरीर हाजिर होने का आदेश
मामले की गंभीरता और कानून व्यवस्था के उल्लंघन को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने किच्छा के उपजिलाधिकारी (SDM) और संबंधित कोतवाली के थानाध्यक्ष (SHO) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने इन दोनों जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है कि वे आगामी सोमवार, 6 जुलाई को उच्च न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से (सशरीर) उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
सिविल कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने की हिदायत, 6 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को कड़े शब्दों में निर्देशित किया है कि इस विवादित संपत्ति को लेकर पूर्व में सिविल कोर्ट द्वारा 11 जून को पारित किए गए यथास्थिति व सुरक्षा संबंधी आदेश का जमीनी स्तर पर अक्षरशः और सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
कोर्ट ने साफ किया है कि कानून के राज में किसी भी नागरिक की निजी संपत्ति पर बलपूर्वक कब्जा और महिलाओं-बच्चों को डराना-धमकाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने इस संवेदनशील रिट याचिका पर विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए मामले की अगली अग्रिम सुनवाई के लिए भी सोमवार, 60 जुलाई की तिथि निर्धारित कर दी है। इस सख्त रुख के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
