देहरादून: भारतीय सेना और देश के सार्वजनिक जीवन में अपनी कर्तव्यनिष्ठ सेवा से एक अमिट छाप छोड़ने वाले मिजोरम और पुडुचेरी के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल मदन मोहन लखेड़ा (सेवानिवृत्त) का सोमवार को दुखद निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहे थे और देहरादून के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहाँ उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके महाप्रयाण की खबर मिलते ही सैन्य गलियारों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक क्षेत्रों में गहरे शोक की लहर दौड़ गई है।

राज्यपाल ने निवास स्थान पहुंचकर दी विदाई

लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा के निधन पर उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने गहरा शोक प्रकट किया। राज्यपाल मंगलवार को दिवंगत लखेड़ा के देहरादून स्थित पैतृक आवास पर पहुंचे, जहाँ उन्होंने पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।

सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

राजकीय विदाई:

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, देश के प्रति उनकी महान सेवाओं को देखते हुए स्वर्गीय लखेड़ा का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान (State and Military Honors) के साथ देहरादून के हरिद्वार बाईपास स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा। इस दौरान सेना के उच्च अधिकारी, पूर्व सैनिक और राज्य सरकार के प्रतिनिधि उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद रहेंगे।

गौरवशाली रहा है सैन्य और प्रशासनिक जीवन

लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। भारतीय सेना में शामिल होकर उन्होंने देश की कई महत्वपूर्ण सीमाओं पर अपनी सेवाएं दीं और वे सेना के शीर्ष पदों तक पहुंचे।

  • सैन्य करियर: सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी देश सेवा के प्रति उनका जज्बा कम नहीं हुआ।

  • संवैधानिक पद: उनकी प्रशासनिक क्षमताओं को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पहले पुडुचेरी का उपराज्यपाल और बाद में मिजोरम के राज्यपाल पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसका उन्होंने पूरी निष्ठा से निर्वहन किया।

उनका जाना उत्तराखंड और पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।