हिमालयी जैव विविधता की नई तस्वीर, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में मिले कई दुर्लभ वन्यजीव
ज्योतिर्मठ: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) के अंतर्गत आयोजित 'चतुर्थ नंदा देवी जैव विविधता अनुश्रवण दशकीय अभियान 2026' को वैज्ञानिकों के दल ने सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। देश के शीर्ष विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की इस टीम ने दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं, मखमली बुग्यालों और गहरी घाटियों में लगातार 21 दिनों तक कड़ा निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्य जीवों की स्थिति और जैव विविधता में आ रहे बड़े बदलावों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक जानकारियां जुटाई हैं।
कैमरे में कैद हुए दुर्लभ हिमालयी वन्य जीव
इस 21 दिवसीय कड़े शोध अभियान के दौरान खोजी दल को हिमालयी थार (दुर्लभ जंगली बकरी), हिमालयी भालू और साइबेरियन वीजल जैसे अत्यंत दुर्लभ और विलुप्तप्राय वन्य जीव साक्षात दिखाई दिए। वैज्ञानिकों का यह विशेष दल बीते 7 जून 2026 को ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) से अपने इस गोपनीय और महत्वपूर्ण अध्ययन के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के सबसे संवेदनशील 'कोर जोन' की तरफ रवाना हुआ था।
देश के शीर्ष संस्थानों के विशेषज्ञ रहे शामिल
संयुक्त अभियान दल:
इस ऐतिहासिक अभियान को अंजाम देने वाली टीम में भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून), जीबी पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान (कोसी-अल्मोड़ा), एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (श्रीनगर) और उत्तराखंड वन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक व तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। इसके अलावा, दुर्गम रास्तों पर टीम की सुरक्षा और मदद के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के जांबाज जवानों को भी तैनात किया गया था।
हाईटेक तकनीकों से ट्री-लाइन और हिमनदों का अध्ययन
यह साहसिक अभियान लाता गांव से प्रारंभ होकर लाताखर्क, धरासी, डिब्रूगेटा, डियोड़ी, भितरतोली, रामनी, मुजगढ़ और पातालखान जैसे अत्यंत कठिन और बर्फीले रास्तों से होते हुए सीधे नंदा देवी के बेस कैंप 'सरसोपाताल' तक पहुंचा।
इस यात्रा के दौरान वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया, जिसमें:
-
ड्रोन और रिमोट सेंसिंग (सुदूर संवेदन)
-
कैमरा ट्रैप्स (वन्यजीवों की निगरानी के लिए)
-
जीआइएस (GIS) और ओएसएल (OSL) प्रणाली
इन आधुनिक उपकरणों की मदद से टीम ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों की अनोखी जैव विविधता, ऊंचाई पर बदल रहे वृक्षरेखा (ट्री-लाइन) के विशेष पैटर्न, ग्लेशियरों (हिमनदों) की वर्तमान स्थिति और मोरेन (हिमनद मलबे) का बेहद बारीकी से और गहन अध्ययन किया है। यह डेटा भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
