रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून की दस्तक के साथ ही विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा की रफ्तार अब धीरे-धीरे धीमी पड़ने लगी है। कुछ दिनों पहले तक जहां प्रतिदिन रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए उमड़ रहे थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर औसतन सात से आठ हजार श्रद्धालु प्रतिदिन पर आ गया है। यात्रियों की आवक में आई इस अचानक गिरावट का सीधा और व्यापक असर केदारनाथ मार्ग तथा धाम के स्थानीय कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

मौसम के मिजाज ने थामी यात्रियों की रफ्तार

पहाड़ों में मानसून के सक्रिय होते ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग द्वारा लगातार जारी किए जा रहे अलर्ट के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में रात के समय भारी बारिश हो रही है, जबकि सुबह के वक्त समूचे मार्ग में घना कोहरा छाए रहने के कारण यात्रा का संचालन प्रभावित हो रहा है। हालांकि, कपाट खुलने के बाद से अब तक का कुल रिकॉर्ड देखा जाए तो धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का संचयी आंकड़ा 13 लाख के पार पहुंच चुका है। इसके बावजूद, जून के अंत में मानसून की शुरुआत होते ही प्रतिदिन आने वाले यात्रियों का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है।

69 दिनों में बना रिकॉर्ड, फिर आई गिरावट

इस वर्ष 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। कपाट खुलने के बाद से लेकर अब तक के 69 दिनों के सफर में कुल 13,61,160 श्रद्धालु बाबा केदार के दरबार में मत्था टेक चुके हैं। यात्रा के शुरुआती डेढ़ महीने में रिकॉर्डतोड़ भीड़ देखने को मिली थी, जिसने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। लेकिन वर्तमान में पहाड़ी रास्तों पर लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन के खतरे और सुबह के समय दृश्यता (विजिबिलिटी) बेहद कम होने के कारण बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों ने फिलहाल अपनी यात्रा को टालना शुरू कर दिया है।

स्थानीय व्यापार और पर्यटन उद्योग प्रभावित

केदारनाथ धाम में अचानक यात्रियों की संख्या सीमित होने से सोनप्रयाग, गौरीकुंड और मुख्य धाम परिसर में स्थित होटल, लॉज, रेस्टोरेंट तथा अन्य स्थानीय छोटे-बड़े कारोबार पूरी तरह प्रभावित होने लगे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अचानक भीड़ कम होने से उनके व्यवसाय पर सीधा और विपरीत असर पड़ा है। होटल एसोसिएशन के सचिव मनोज सेमवाल ने इस स्थिति पर तकनीकी पहलू साझा करते हुए बताया कि सामान्य तौर पर हर साल जून के अंतिम सप्ताह में मानसून आने पर श्रद्धालुओं की संख्या घटती है, लेकिन इस वर्ष जून के पहले सप्ताह में ही प्रशासन द्वारा यात्रा पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) अस्थाई रूप से बंद किए जाने के कारण चारधाम यात्रा की लय पहले ही प्रभावित हो गई थी, जिसके चलते यात्रियों की संख्या में कमी उम्मीद से पहले ही दर्ज होने लगी।